ओम पर्वत पर एक साथ दो ओम की आकृति दिखाई देने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कौतूहल का विषय बन गया. रिपोर्ट- प्रदीप मेहरा
पिथौरागढ़ (उत्तराखंड): सीमांत पिथौरागढ़ जिले में सीमांत क्षेत्र चीन सीमा से सटी व्यास घाटी में स्थित पवित्र ओम (ॐ) पर्वत पर इन दिनों प्रकृति का एक ऐसा अनूठा और अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है. जिसने श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अभिभूत कर दिया है. ईटीवी भारत संवाददाता ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर इस पल-पल बदलते रूप का आंखों देखा हाल जाना. इस दौरान सामने आया कि ओम पर्वत के ढलान पर इस बार एक और ओम जैसी आकृति प्राकृतिक रूप से उभर आई है. आस्था और कुदरत के मिलन की एक बेहद विस्मरणीय तस्वीर को देखकर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया है.
एक साथ दो ओम की आकृतियों ने बढ़ाया कौतूहल: आदि कैलाश यात्रा पर पहुंचे तीर्थयात्री और पर्यटक इस दुर्लभ नजारे को देखकर पूरी तरह से अभिभूत हैं. सामान्य तौर पर इस पर्वत पर बर्फ के प्राकृतिक जमाव से केवल एक ही पवित्र ओम शब्द की आकृति दिखाई देती है. लेकिन इस बार मुख्य आकृति के ठीक पास दूसरी ओम जैसी आकृति का उभरना आस्था और चमत्कार का अनोखा संगम माना जा रहा है.
आस्था व प्रकृति का अनूठा मिलन मान रहे श्रद्धालु: मुख्य ओम आकृति के साथ दूसरी वैसी ही आकृति का दिखना उनके लिए एक अत्यंत आश्चर्यजनक और आध्यात्मिक अनुभव है. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी एक साथ दो ओम की आकृतियां नहीं देखी थीं. श्रद्धालु इसे भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद और आस्था व प्रकृति का अनूठा मिलन मान रहे हैं.
समय से पहले मौसम ने बदला मिजाज: आमतौर पर इस उच्च हिमालयी क्षेत्र में भारी हिमपात की शुरुआत नवंबर महीने के आसपास से तेज होती है. हालांकि, इस साल मौसम के मिजाज में थोड़ा बदलाव देखा गया. सितंबर के अंतिम सप्ताह और अक्टूबर महीने में हुई समय से पहले (असमय) बर्फबारी के कारण यह मनमोहक दृश्य अक्टूबर में ही स्पष्ट रूप से सामने आ गया.
यात्रियों में दिखा खासा उत्साह: उल्लेखनीय है कि गर्मियों के मौसम में तापमान बढ़ने और बर्फ के पिघलने की वजह से ओम की पारंपरिक आकृति धीरे-धीरे ओझल हो जाती है. लेकिन इस बार नई बर्फ जमने की प्रक्रिया के साथ ही न केवल मुख्य ओम (ॐ) आकृति निखर कर आई, बल्कि उसके साथ एक नई दूसरी ओम जैसी आकृति भी सतह पर उभर आई. इस नजारे ने यात्रियों के उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया है.
नाभीढांग के पास स्थित है यह पावन स्थल: भौगोलिक दृष्टिकोण से देखें तो पवित्र ओम पर्वत उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में नाभीढांग के समीप स्थित है. यह क्षेत्र प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग के प्रमुख और सबसे आकर्षण केंद्रों में गिना जाता है. पर्वत की ढलान पर जमी बर्फ प्राकृतिक रूप से पवित्र ओम अक्षर का आकार ले लेती है, इसी अद्वितीय विशेषता के कारण इस पर्वत का नाम ‘ओम पर्वत’ पड़ा.
देश-विदेश से बड़ी तादाद में पहुंचे हैं यात्री: धार्मिक और आध्यात्मिक महत्वहिंदू धर्म और संस्कृति में ओम को ब्रह्मांड की प्रथम ध्वनि और अत्यंत पवित्र प्रतीक माना गया है. इसी धार्मिक मान्यता के कारण देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु ओम पर्वत के दर्शन को केवल एक पर्यटक स्थल नहीं, बल्कि यहां की आध्यात्मिक और दिव्य अनुभव को महसूस करने आते हैं. आदि कैलाश यात्रा पर जाने वाले हर यात्री के लिए ओम पर्वत के दर्शन करना यात्रा का सबसे मुख्य और अविस्मरणीय हिस्सा होता है.
पर्यटन का प्रमुख केंद्र और मौसम पर निर्भरता: धार्मिक आस्था के साथ-साथ ओम पर्वत अपनी विशाल हिमालयी चोटियों, बर्फ की सफेद चादर ढकी ढलानों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. मौसम साफ रहने पर दूर-दूर से इसकी चोटियां बेहद आकर्षक और स्पष्ट नजर आती हैं.
आकृतियों में आ सकता है बदलाव: हालांकि, हिमालयी क्षेत्रों में मौसम बहुत तेजी से बदलता है. विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि बर्फबारी, तापमान और हवा की परिस्थितियों के अनुसार पर्वत पर बनने वाली बर्फ की इन आकृतियों में बदलाव आ सकता है. इसलिए दो ओम का यह दुर्लभ नजारा कितने समय तक इसी रूप में बना रहेगा, यह पूरी तरह से आने वाले दिनों के मौसम पर निर्भर करेगा.
