भांग की खेती को लेकर पुलिस एक्शन मोड पर है. पुलिस ने जिले में अज्ञात पर पहला मुकदमा दर्ज किया है.
पिथौरागढ़: पहाड़ी संस्कृति में भांग की चटनी का स्वाद और विशेष स्थान सदियों पुराना है. उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भांग के बीजों से तैयार होने वाली पारंपरिक चटनी खानपान का अहम हिस्सा रही है. लेकिन अब सीमांत क्षेत्रों में भांग की खेती को लेकर पुलिस की सख्ती बढ़ने लगी है.
अवैध खेती और उसके जरिए नशीले पदार्थ तैयार करने की आशंका के बीच पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. जिले में भांग की खेती के मामले में पहला मुकदमा दर्ज होने के बाद ग्रामीणों के बीच चिंता बढ़ गई है.सीमांत धारचूला के गलाती क्षेत्र में पुलिस ने को अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8(बी)/20(क्यू) के तहत मुकदमा दर्ज किया है. पुलिस के अनुसार, मामले में भांग की खेती किए जाने की शिकायत सामने आई थी. इसके बाद संबंधित मामले में कानूनी कार्रवाई की गई. सीमांत पिथौरागढ़ क्षेत्र में भांग की खेती को लेकर दर्ज यह पहला मुकदमा बताया जा रहा है.
सीमांत जिले में भांग की बढ़ती खेती और इसके दुरुपयोग की शिकायतों के बाद पुलिस लंबे समय से विशेष अभियान चला रही है. पुलिस की टीमें गांव-गांव पहुंचकर ग्रामीणों को भांग के पौधों और नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि अवैध रूप से भांग की खेती बर्दाश्त नहीं की जाएगी. भूमि पर अवैध तरीके से भांग के पौधे उगाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी.भांग की खेती पर कार्रवाई की खबर से ग्रामीणों के बीच एक अलग तरह की चिंता भी सामने आ रही है.
पहाड़ में भांग के बीजों से तैयार होने वाली चटनी पारंपरिक खानपान का अहम हिस्सा है. सर्दियों में भांग के बीजों को भूनकर और पीसकर बनाई जाने वाली चटनी का स्वाद स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है. ग्रामीणों का कहना है कि भांग का पारंपरिक उपयोग नशे के लिए नहीं, बल्कि भोजन के रूप में भी होता रहा है. ऐसे में खेती पर सख्ती का असर पारंपरिक खानपान पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.पुलिस का कहना है कि अभियान का उद्देश्य नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाना है.
भांग की अवैध खेती और उसके गंभीर मामला है. उम्मीद है कि स्थानीय लोग कानून का सहयोग करेंगे और अवैध खेती से दूरी बनाए रखेंगे.
-ललित मोहन जोशी, कोतवाल-
अवैध खेती और नशीले पदार्थ तैयार करने की गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. ग्रामीणों से भी अपील की जा रही है कि वे नशे के अवैध कारोबार से दूर रहें और पुलिस को सहयोग दें. पुलिस अभियान के तहत गांवों में निगरानी बढ़ाने के साथ ही लोगों को कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है. सीमांत क्षेत्र में भांग की खेती के नाम पर नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार करने वालों पर नजर रखी जा रही है.
वहीं, ग्रामीणों का मानना है कि पारंपरिक उपयोग और अवैध नशे के कारोबार के बीच अंतर स्पष्ट होना चाहिए, ताकि पहाड़ की खानपान संस्कृति भी सुरक्षित रहे और नशे के अवैध कारोबार पर भी प्रभावी रोक लग सके. लाइसेंस से खेती, मानक के बीजों की कमी भांग की खेती के इच्छुक लोग प्रशासन से निर्धारित अनमति लेकर खेती कर सकते हैं. हालांकि, प्रदेश में मानकों के अनुरूप बीज उपलब्ध नहीं होने से लाइसेंस मिलने के बावजूद खेती करना मुश्किल है. कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नियमानुसार भांग में टीएचसी (नशीले प्रभाव के लिए जिम्मेदार तत्व) की मात्रा 0.3 प्रतिशत या इससे कम होनी चाहिए.
